क्या कभी किसी ने सोचा है
क्या कभी किसी ने पूछा है
तुम्हारी भी कोई चाहत है
तुम्हारी भी कोई इच्छा है
ट्रेफिक सिग्नल पर खड़े
ताली बजा कर पैसे लें
जो ना करे तंग उनको
जी भर के वो दुआ दें.
आए जो कहीं दुल्हन
खबर उनको लग जाती है
आकर दूल्हे के घर वो
आशीर्वाद दे जाते हैं
बदले में मिलता क्या उनको
कुछ कपड़े कुछ रुपए बस.
देता ना कोई इज़्ज़त इनको
मिलता ना कोई सम्मान है
वो भी है इंसान हम से
है उनका भी अपना घर
कुछ कमी है तभी,
वो कहलाते " किन्नर"
Tuesday, December 1, 2009
Thursday, September 24, 2009
फरियाद कर रही हूँ
आँसू बहा बहा कर ,मैं याद कर रही हूँ ,
"नीरा" के नीर देखो ,फरियाद कर रही हूँ
आँखों मे हैं जुदाई के बेसुकून लम्हे,
आहों से अपने दिल को आबाद कर रही हूँ
मीठे पलों को खातों में क़ैद कर रही हूँ
भीगी आँखों से पढ़ पलकें नम कर रही हूँ
फासलों से दूर दिल में बसेरा कर रही हूँ
मुलाकात के आसरे हर सरहदद पर कर रही हूँ
मिल जाए सुकून बाँध जाऊं हर जनम
मंदिर सा दिल मुहब्बत से आबाद कर रही हूँ
"नीरा" के नीर देखो ,फरियाद कर रही हूँ
आँखों मे हैं जुदाई के बेसुकून लम्हे,
आहों से अपने दिल को आबाद कर रही हूँ
मीठे पलों को खातों में क़ैद कर रही हूँ
भीगी आँखों से पढ़ पलकें नम कर रही हूँ
फासलों से दूर दिल में बसेरा कर रही हूँ
मुलाकात के आसरे हर सरहदद पर कर रही हूँ
मिल जाए सुकून बाँध जाऊं हर जनम
मंदिर सा दिल मुहब्बत से आबाद कर रही हूँ
Sunday, September 20, 2009
केसे तुझ बिन रह पाऊँगी
केसे बैठूं डोली में माँ
आएगी जब याद तेरी
यूँही आंसू बहायूंगी
तुझ बिन रह ना पाऊँगी
वो पल जो तेरे आंगन में
मैंने इतने दिन गुजारे हैं
वो दीवारें जिन पर मैंने
रंगों के निशान बनाये हैं
केसे उनको भूल पाऊँगी
पता है माँ मेरी गुडिया
आज भी संदूक में रखी है
क्या हुआ जो उसकी एक टांग छोटी है
केसे उसको छोर जाउंगी
आंगन में भिखरी हैं यादें
बुहार के भी ना समेट पाऊँगी
आएगी तेरी याद दिन, रात मुझको
केसे तुझ बिन रह पाऊँगी
बाबुल कि भिलाख्ती आंखे
दिल मेरा चीर देती हैं
भाई के नन्हे हाथ मुझे
जाने से रोक लेते हैं
इनकी आँखों से निकले आंसूं
केसे मैं देख पाऊँगी
क्या बेटी तुझ पर बोझ है माँ
क्यूँ नहीं रह सख्ती तेरे साथ
भाई भी तोः लायेगा भाभी
जमाई को भी ले आ घर
माँ चल आ कुछ नया करें
आज नया इतहास रचें
नयी कुछ रौशनी जगाएं
बता माँ तू ही बता
केसे तुझ बिन रह पाऊँगी
आएगी जब याद तेरी
यूँही आंसू बहायूंगी
तुझ बिन रह ना पाऊँगी
वो पल जो तेरे आंगन में
मैंने इतने दिन गुजारे हैं
वो दीवारें जिन पर मैंने
रंगों के निशान बनाये हैं
केसे उनको भूल पाऊँगी
पता है माँ मेरी गुडिया
आज भी संदूक में रखी है
क्या हुआ जो उसकी एक टांग छोटी है
केसे उसको छोर जाउंगी
आंगन में भिखरी हैं यादें
बुहार के भी ना समेट पाऊँगी
आएगी तेरी याद दिन, रात मुझको
केसे तुझ बिन रह पाऊँगी
बाबुल कि भिलाख्ती आंखे
दिल मेरा चीर देती हैं
भाई के नन्हे हाथ मुझे
जाने से रोक लेते हैं
इनकी आँखों से निकले आंसूं
केसे मैं देख पाऊँगी
क्या बेटी तुझ पर बोझ है माँ
क्यूँ नहीं रह सख्ती तेरे साथ
भाई भी तोः लायेगा भाभी
जमाई को भी ले आ घर
माँ चल आ कुछ नया करें
आज नया इतहास रचें
नयी कुछ रौशनी जगाएं
बता माँ तू ही बता
केसे तुझ बिन रह पाऊँगी
Sunday, August 23, 2009
औरत की क्या हस्ती है
औरत की क्या हस्ती है
चीज़ वोः कितनी सस्ती है
कहीं वोः दिल की रानी है
कहीं बस एक कहानी है
कितनी बेबस दिखती है
जब बाज़ार में बिकती है
कहीं वोः दुर्गा माता है
इस संसार की दाता है
कहीं वोः घर की दासी है
नादिया हो कर प्यासी है
सब के ताने सहती है
फिर भी वोः चुप रहती है
सरस्वती का अवतार है वोः
शिक्षा का भंडार है वोः
किस्मत उसपे हंसती है
जब शिक्षा को तरसती है
क्या क्या ज़ुल्म वोः सहती है
फिर भी हंसती रहती है
कहीं सजा यह पाती है
गर्ब में मारी जाती है
कहीं वोः माता काली है
कहीं वोः एक सवाली है
खाली हाथों आने पर
दान-दहेज़ ना लाने पर
ज़ुल्म यह धाया जाता है
उसको जलाया जाता है
नीर नयन से बरसे है वोः
मुस्कान को तरसे है
खुशियों को तरस्ती है
औरत की क्या हस्ती है
चीज़ वोः कितनी सस्ती है
कहीं वोः दिल की रानी है
कहीं बस एक कहानी है
कितनी बेबस दिखती है
जब बाज़ार में बिकती है
कहीं वोः दुर्गा माता है
इस संसार की दाता है
कहीं वोः घर की दासी है
नादिया हो कर प्यासी है
सब के ताने सहती है
फिर भी वोः चुप रहती है
सरस्वती का अवतार है वोः
शिक्षा का भंडार है वोः
किस्मत उसपे हंसती है
जब शिक्षा को तरसती है
क्या क्या ज़ुल्म वोः सहती है
फिर भी हंसती रहती है
कहीं सजा यह पाती है
गर्ब में मारी जाती है
कहीं वोः माता काली है
कहीं वोः एक सवाली है
खाली हाथों आने पर
दान-दहेज़ ना लाने पर
ज़ुल्म यह धाया जाता है
उसको जलाया जाता है
नीर नयन से बरसे है वोः
मुस्कान को तरसे है
खुशियों को तरस्ती है
औरत की क्या हस्ती है
Friday, August 7, 2009
प्यार के बदले जो जुल्म ढाते हैं
प्यार के बदले जो जुल्म ढाते हैं ।
तोड़कर दिल कैसे मुस्कराते हैं ॥
तोड़कर दिल कैसे मुस्कराते हैं ॥
माँगते खुशी के चंद पल जिनसे ।
वही ताउम्र गम का रिश्ता बनाते हैं ॥
पत्थर से लगी चोट सभी सहते हैं ।
अपनों से लगे घाव दर्द को बढ़ाते हैं॥
लगाई तोहमत जिन्होंने बेवफाई की ।
बिस्तर गैर का अब शान से सजाते हैं ॥
किस भरम से मेहरबानी करूँ या रब ।
रहकर दूर हमसे ऐहसान जो बताते हैं ॥
संगदिल तो थे ही खुदगर्ज भी बने ।
बेरुखी दिखाकर वो आज भी सताते हैं ॥
- नीरा
Thursday, July 30, 2009
गंगा तो बहती जाएगी
खुद में सब को समाएगी
करते हैं पाप जो दिन रात
उनके लिए भी मुक्ति लाएगी
गंगा तो बहती जायेगी
लूटते किस तरहां ज़िंदगियाँ
बैठ के गंगा किनारे फिर
जप्पते हैं राम नाम यह
करते हैं बलात्कार भी
इक दिन ज़िंद ताड़पाएगी
गंगा तो बहती जाएगी
चोरी डकैती इनके शौक़ हैं
हथियार से होली खेलते हैं
आतंक फैला रखा है यहाँ
देश को भी बैच देते हैं
इक दिन उफान ये लाएगी
गंगा तो बहती जाएगी
गंगा सब कुछ जानती है
पापी के लिए भी रो लेती है
दिल उसका बहुत महान है
सब के पाप धो देती हैं
वो दिल शिव-शिव कहलाएगी
गंगा तो बहती जाएगी
पाप या हो आस्तियाँ किसी
किहर चीज़ बहा ले जाती है
गंगा जल पावन है इतना
जिसे छूए उसे भा जाती है
हर दिल में जगह बनाएगी
गंगा तो बहती जाती ही
शिव केशसे उतार मा गंगा
भाव सागर में मिल जायेगी
करते हैं पाप जो दिन रात
उनके लिए भी मुक्ति लाएगी
गंगा तो बहती जायेगी
लूटते किस तरहां ज़िंदगियाँ
बैठ के गंगा किनारे फिर
जप्पते हैं राम नाम यह
करते हैं बलात्कार भी
इक दिन ज़िंद ताड़पाएगी
गंगा तो बहती जाएगी
चोरी डकैती इनके शौक़ हैं
हथियार से होली खेलते हैं
आतंक फैला रखा है यहाँ
देश को भी बैच देते हैं
इक दिन उफान ये लाएगी
गंगा तो बहती जाएगी
गंगा सब कुछ जानती है
पापी के लिए भी रो लेती है
दिल उसका बहुत महान है
सब के पाप धो देती हैं
वो दिल शिव-शिव कहलाएगी
गंगा तो बहती जाएगी
पाप या हो आस्तियाँ किसी
किहर चीज़ बहा ले जाती है
गंगा जल पावन है इतना
जिसे छूए उसे भा जाती है
हर दिल में जगह बनाएगी
गंगा तो बहती जाती ही
शिव केशसे उतार मा गंगा
भाव सागर में मिल जायेगी
Saturday, July 25, 2009
मेरा तो शाम से जी घबराए
मेरा तो शाम से जी घबराए
दीया जलाते ही मन मेरा होता है बेचैन
रोज़ सितारे गिन गिन कटती मुझ दुखिया कि रैन
लम्बी लम्बी रातें मूझ को पल भर नींद ना आये
मेरा तो शाम से जी घबराए
अफसानों में लिखा हुवा है तेरा मेरा प्यार
तुझ पे दिल और जान निछावर साजन सौ सौ बार
प्यार में जो मिट जाये वोही तो दीवाना कहलाये
मेरा तो शाम से जी घबराए
सावन का मौसम आया जब काली बदली छाई
पानी कि ठंडी बूंदों ने तन में आग लगाई
इक बिरहन ऐसे में केसे तनहा रात बिताये
मेरा तो शाम से जी घबराए
किस को दर्द बताऊं किस को दिल का हाल सुनाऊं
शर्म के मारे सखियों से भी दिल की बात छुपायुं
नाम जुबां पे तेरा आते आते बस रह जाये
मेरा तो शाम से जी घबराए
दूर रहूँ मैं तूझ से यह मेरा दस्तूर नहीं है
दूर है मुझ से ऐ साजन तो फिर भी दूर नहीं है
दिल में जो रहता है दिल उसको ही ढूंढ ना पाए
मेरा तो शाम से जी घबराए
दीया जलाते ही मन मेरा होता है बेचैन
रोज़ सितारे गिन गिन कटती मुझ दुखिया कि रैन
लम्बी लम्बी रातें मूझ को पल भर नींद ना आये
मेरा तो शाम से जी घबराए
अफसानों में लिखा हुवा है तेरा मेरा प्यार
तुझ पे दिल और जान निछावर साजन सौ सौ बार
प्यार में जो मिट जाये वोही तो दीवाना कहलाये
मेरा तो शाम से जी घबराए
सावन का मौसम आया जब काली बदली छाई
पानी कि ठंडी बूंदों ने तन में आग लगाई
इक बिरहन ऐसे में केसे तनहा रात बिताये
मेरा तो शाम से जी घबराए
किस को दर्द बताऊं किस को दिल का हाल सुनाऊं
शर्म के मारे सखियों से भी दिल की बात छुपायुं
नाम जुबां पे तेरा आते आते बस रह जाये
मेरा तो शाम से जी घबराए
दूर रहूँ मैं तूझ से यह मेरा दस्तूर नहीं है
दूर है मुझ से ऐ साजन तो फिर भी दूर नहीं है
दिल में जो रहता है दिल उसको ही ढूंढ ना पाए
मेरा तो शाम से जी घबराए
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